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शंख घोष

उठी जाग हे वीर हो प्रात आयो सुनौलो विहानी खुसी भै उदायो निरंकुसता को दियो निभ्न लाग्यो रुढी वादको क्रुर अन्याय भाग्यो (१) उठी जाग हे न्यायका दिव्य रुप नयां…